Tuesday, May 31, 2011

raat ...

एक बार एक रातने सुबह से कूच खास मांग लिया 
अपना गेहरापन देकर थोडा वक्त मांग लिया

रात बीती नही थी अब तक ठीक से
गुजरते हुये थंडे झोंकेसे थोडा इंतेजार मांग लिया

ठेहरी थी रात यूही कभी नदी किनारे
पानी में टाकते चांद से घना अंधेरा मांग लिया

रातरानी फैलाती अपनी खुशबू चारो दिशाओमे,
इस धुंद हवाओसे थोडा नशा मांग लिया 
रात कि गेहरी खामोशी पढने के लिये 
उजाला नाही अंधेरा मांग लिया....


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